सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा। विकट रुप धरि लंक जरावा॥ ओम् ऐं ह्रीं हनुमते रामदुते लंकविधवंसने अंजनी गर्भ सम्भुतय शकिनि डाकिनी विध्वंसनाय किलकिली बुबुकरेन विभीषण हनुमददेवय ओम ह्रीं ह्रीं हं फट् स्वाहा सहस बदन तुम्हरो यश गावैं। अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥ आधुनिक दुनिया में हनुमान चालीसा का क्या https://directoryindexer.com/listings13212345/5-easy-facts-about-hanuman-chalisa-described